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कोई कहे


कोई कहे हसीं मौसम है सावनकोई कहे राहत भरा आराम है

कोई कहे चटपटे पकवान सावनकोई कहे श्रंगार और परिधान है

कोई कहे खेत खलिहान सावनकोई कहे कार्य में व्यवधान है

अतृप्त प्यास को बुझाता सावननीरस जीवन में एक वरदान है ।

मं शर्मा (रज़ा)

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