अर्थ बदलते हैं लफ्जों केलफ्ज़ों पे कैसे यकीन करूँनम रहती हैं आँखें हर दमकिस तरह आँखों को पढ़ूँ ।मं शर्मा( रज़ा)
अर्थ बदलते हैं लफ्जों केलफ्ज़ों पे कैसे यकीन करूँनम रहती हैं आँखें हर दमकिस तरह आँखों को पढ़ूँ ।
मं शर्मा( रज़ा)