सूरज की किरणों ने जगायाभोर हुई अब सबको बतायाकलियों ने भी आँखें खोलींतुमने क्यों मन नहीं बनायाकलरव करते पंछी कहतेचलो अब सब काम पे चलतेदरिया में बिखरा होगा सोनाचलो दामन में भरने चलते।मं शर्मा (रज़ा)
सूरज की किरणों ने जगायाभोर हुई अब सबको बतायाकलियों ने भी आँखें खोलींतुमने क्यों मन नहीं बनाया
कलरव करते पंछी कहतेचलो अब सब काम पे चलतेदरिया में बिखरा होगा सोनाचलो दामन में भरने चलते।
मं शर्मा (रज़ा)