भूख लगी है कब मुझको

और कब मुझको सोना है

बिन कहे कैसे जान लेती हो

मुझे तेरे आँचल में छिपना है


मेरी दुनिया तुम तक सीमित

तुम से रचा बसा हर कोना है

तेरी मुस्कान और मीठी लोरी

दुनिया में इससे कीमती क्या होना है ।



मं शर्मा (रज़ा)