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ख्याति


मन में विचार होबुद्धि को स्वीकार होबाजुओं में दम होहार का ग़म न हो

बढ़ा चल डगरअपनीलक्ष्य पे नज़र पैनीसफलता पग चूमेगीख्याति तेरा घर ढूँढेगी।

मं शर्मा (रज़ा)

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