दिल की कोई खिड़की
खुली हुई है
अभी इस दिल में
दस्तक हुई है
धड़कने समेट रहा हूँ कब से
जिंदगी यूँ भी बिखरी हुई है ।
मं शर्मा( रज़ा)
#स्वरचित


दिल की कोई खिड़की
खुली हुई है
अभी इस दिल में
दस्तक हुई है
धड़कने समेट रहा हूँ कब से
जिंदगी यूँ भी बिखरी हुई है ।
मं शर्मा( रज़ा)
#स्वरचित