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खिलौने


वो माँ की लोरीसपनों की डोरीपिता संग मेलायारों संग खेलादादी का दुलारनानी का मनुहारहाथों से फिसल गएदेखते देखतेकहीं खो गए सबखिलौने खेलते खेलते।

मं शर्मा (रज़ा)

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