कई बार मुड़ के देखा

एक शख्स को

चेहरे बदल रहे थे

रंग हरेक शख्स के


मासूम सूरतों में

गजब फरेब था

हाथों में थे फूल

इरादों में खंजर था।



मं शर्मा (रज़ा)