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कायल


जब भी तन्हा होता हूँखामोशियों को सुनता हूँशोर कानों में कुछ कहता हैमैं अनदेखा कर देता हूँ

खामोशियों का कायल हूँतन्हाईयों में जीता हूँकोलाहल मुझसे डरता हैप्राणों की भीख मांगता है।मं शर्मा (रज़ा)

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