कलम की धार से
शब्दों को तराश कर
समाज के उत्थान की
प्रस्तावना लिखता हूँ
कवि हूँ इस युग का
कविता रचता हूँ
कलम के तरकश से
शब्दों के बाण निकाल
कुरीतियों के पतन का
उपसंहार लिखता हूँ
कवि हूँ इस युग का
कविता गढ़ता हूँ ।
मं शर्मा (रज़ा)
कलम की धार से
शब्दों को तराश कर
समाज के उत्थान की
प्रस्तावना लिखता हूँ
कवि हूँ इस युग का
कविता रचता हूँ
कलम के तरकश से
शब्दों के बाण निकाल
कुरीतियों के पतन का
उपसंहार लिखता हूँ
कवि हूँ इस युग का
कविता गढ़ता हूँ ।
मं शर्मा (रज़ा)