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कटा पेड़


मैं घना पेड़ था रास्ते काआज बेबस अपंग हुआ हूँइंसानों के जुल्मों का देखोकैसा मैं शिकार हुआ हूँ

क्षत विक्षत किए अंग सभीधड़ को मेरे काट गएतुमको क्या दे पाऊँगा मैंमुझे मेरी छाया से विहीन कर गए।

मं शर्मा (रज़ा)

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