तेरी दस्तक पे
हर दर खुले
ज़रूरी तो नहीं
हर बात पर
कसूर गिनाया न कर
बीती यादों को
इतना भी
संजो कर न रख
बेचैन करने लगें
आँसू बहाया न कर
वक्त बता देगा
सबकी असलियत
खुद ही
बेवजह मन में
रंजिशें पाला न कर ।
मं शर्मा (रज़ा)
तेरी दस्तक पे
हर दर खुले
ज़रूरी तो नहीं
हर बात पर
कसूर गिनाया न कर
बीती यादों को
इतना भी
संजो कर न रख
बेचैन करने लगें
आँसू बहाया न कर
वक्त बता देगा
सबकी असलियत
खुद ही
बेवजह मन में
रंजिशें पाला न कर ।
मं शर्मा (रज़ा)