जन्मों के फासले भी आ जाएं दरम्यांकर्म हैं कि कभी पीछा नहीं छोड़ते।मं शर्मा (रज़ा)
जन्मों के फासले भी आ जाएं दरम्यांकर्म हैं कि कभी पीछा नहीं छोड़ते।
मं शर्मा (रज़ा)