पके आम की बेला हैवक्त के हाथ में ढेला हैसिर्फ तूने नहीं झेला हैयहाँ आँधियों का रेला हैसब कर्मों का खेला हैप्रारब्ध ने धकेला हैजीवन समर- बेला हैसिर्फ तूही नहीं अकेला है।मं शर्मा (रज़ा)
पके आम की बेला हैवक्त के हाथ में ढेला हैसिर्फ तूने नहीं झेला हैयहाँ आँधियों का रेला है
सब कर्मों का खेला हैप्रारब्ध ने धकेला हैजीवन समर- बेला हैसिर्फ तूही नहीं अकेला है।
मं शर्मा (रज़ा)