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कर्कश


कर्कश जुबाँ का लहजा जुदा थाइंसां नहीं रूतबा बोल रहा थाकब तक करता उसकी मज़ामतखुद की भी वो कहाँ सुन रहा था।

मं शर्मा (रज़ा)

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