फूल नहीं मैं कोमल सुंदरसब के मन को भा जाऊँकाँटा हूँ मैं कठोर तनधारीशूल सा सबको चुभता जाऊँफूलों का रक्षक बनके आयाफिर भी कंटक कहलाऊँजैसा मान मिलता जग मेंवैसा ही सबको लुटाऊँ ।मं शर्मा (रज़ा)
फूल नहीं मैं कोमल सुंदरसब के मन को भा जाऊँकाँटा हूँ मैं कठोर तनधारीशूल सा सबको चुभता जाऊँ
फूलों का रक्षक बनके आयाफिर भी कंटक कहलाऊँजैसा मान मिलता जग मेंवैसा ही सबको लुटाऊँ ।
मं शर्मा (रज़ा)