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कमी


सब कुछ हैपर कुछ कमी हैखुशी के पल हैंआँखों में नमी है

यादें साथ हैंतू नहीं हैतेरे बिनाकुछ भी नहीं है।

मं शर्मा( रज़ा)#स्वरचित

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