Poetry 1 min read 620.3K reads

कमलनयनी


दर्पण निहारे घड़ी घड़ीनार नवेली खड़ी खड़ीकमल नयनी सुकुमारिनीपियामिलन को चल पड़ी

लगी है बारिश की झड़ीबिजली गिराने चल पड़ीव्याकुल मन को धीर दिलानेछोड़ के विरहा की गली।

मं शर्मा (रज़ा)

Read more Earn more Learn more