दर्पण निहारे घड़ी घड़ीनार नवेली खड़ी खड़ीकमल नयनी सुकुमारिनीपियामिलन को चल पड़ीलगी है बारिश की झड़ीबिजली गिराने चल पड़ीव्याकुल मन को धीर दिलानेछोड़ के विरहा की गली।मं शर्मा (रज़ा)
दर्पण निहारे घड़ी घड़ीनार नवेली खड़ी खड़ीकमल नयनी सुकुमारिनीपियामिलन को चल पड़ी
लगी है बारिश की झड़ीबिजली गिराने चल पड़ीव्याकुल मन को धीर दिलानेछोड़ के विरहा की गली।
मं शर्मा (रज़ा)