भटकी हुई एक काली घटाखिड़की से दाखिल हुईसहमी सी सकुचाई सीमेरे आँगन में बरस गईजीवन के उदास पलों कोठंडी बौछारों से सींच गई।मं शर्मा (रज़ा)
भटकी हुई एक काली घटाखिड़की से दाखिल हुईसहमी सी सकुचाई सीमेरे आँगन में बरस गईजीवन के उदास पलों कोठंडी बौछारों से सींच गई।
मं शर्मा (रज़ा)