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जो चले गए


टूट गए तटबंध सभीबह गए अश्कों के धारे थेहाथ छुड़ा जो चले गएलौट कहाँ फिर आने थे

तोड़ गए वादे सारे जोयुग युग तक निभाने थेरोक सका कौन किसीकोउसके बुलावे पे जाने से ।

मं शर्मा (रज़ा)

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