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जीवनामृत


प्रथम पान तुम जीवन केममता के सोपान तुम्ही होतुम पालनहार शिशुओं केरोगी का उपचार तुम्ही हो

बालक ,वृद्ध या हो पहलवानसबको रखते स्वस्थ बलवानजीवन धार को सिंचित करतेदुग्ध नहीं तुम अमृत हो।

मं शर्मा (रज़ा)

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