जल को यूँ व्यर्थ न करऐसा भी अनर्थ न करयही है तेरी जीवन धाराइसे केवल धारा न समझाकरतेरा आज और तेरा कलदोनों आश्रित हैं जल परजल जीवन का अमृत हैइस बात पर ध्यान धरा कर ।मं शर्मा (रज़ा)
जल को यूँ व्यर्थ न करऐसा भी अनर्थ न करयही है तेरी जीवन धाराइसे केवल धारा न समझाकर
तेरा आज और तेरा कलदोनों आश्रित हैं जल परजल जीवन का अमृत हैइस बात पर ध्यान धरा कर ।मं शर्मा (रज़ा)