जीवन के मेले मेंसंग में कि अकेले मेंमुहब्बत के झूले परप्रेम की पींगे भरा करसावन के महीने मेंबहारों के बहाने हीयौवन की दहलीज़ परजीवन गुलज़ार कर ।मं शर्मा (रज़ा)
जीवन के मेले मेंसंग में कि अकेले मेंमुहब्बत के झूले परप्रेम की पींगे भरा कर
सावन के महीने मेंबहारों के बहाने हीयौवन की दहलीज़ परजीवन गुलज़ार कर ।
मं शर्मा (रज़ा)