इन जर्द पत्तों को देखोऐसे भी न थे ये कभीचाहो तो पूछ लो इनसेदेख चुके हैं बसंत कईहँसना रोना जीना मरनासब क्रमवार चलता हैमत ले दिल पे बोझ इतनाइकदिन सबको जाना पड़ता है ।मं शर्मा (रज़ा)
इन जर्द पत्तों को देखोऐसे भी न थे ये कभीचाहो तो पूछ लो इनसेदेख चुके हैं बसंत कई
हँसना रोना जीना मरनासब क्रमवार चलता हैमत ले दिल पे बोझ इतनाइकदिन सबको जाना पड़ता है ।
मं शर्मा (रज़ा)