Poetry 1 min read 618.5K reads

जाने कब


जाने फिर कब बरसे बादलधरती की प्यास बुझाने कोभीग जाने दो अपने तन मनधुलने दो क्लेश विकारों को

आँसुओं से धोये थे जो गमउन्हें धो लेने दो बौछारों कोआँसुओं को बचा रखो तुममत व्यर्थ गँवाओ बेचारों को।

मं शर्मा (रज़ा)

Read more Earn more Learn more