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जमघट


रूप की छाँव कर रहालटों का जमघट हैसूरज धुंधला रहापड़ा विकट संकट है

रूप ने ओढ़ लियालाज का घूँघट हैकौन छू पाये इसेकिसमें इतना जीवट है।

मं शर्मा (रज़ा)

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