सूख जाएंगे सारे सोतेजल कल के इस धरती पेआज न सोचेगा कल की तोकल रोएगा हाथ मल मल के।मं शर्मा (रज़ा)
सूख जाएंगे सारे सोतेजल कल के इस धरती पेआज न सोचेगा कल की तोकल रोएगा हाथ मल मल के।
मं शर्मा (रज़ा)