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इत्तफाक


हर इत्तफाक तेरी नेमत नहीं रहा होगाकुछ इत्तफाक इत्तफाकन भी हुए होंगेहर धोखा रंजिशन ही नहीं मिला होगाकुछ अपनों की मुहब्बत में भी खाए होंगे ।

मं शर्मा (रज़ा)

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