Poetry 1 min read 489.6K reads

इस्तकबाल


आहट थी खामोशी कीकि दस्तक तेरे ख्याल कीहर बार दर खोल करतेरा इस्तकबाल किया

हर बार लगा तुम होहर बार दिखा साया तेराहमसाया हो तुम मेरीख्वाब यही चलता रहा।

मं शर्मा (रज़ा)

Read more Earn more Learn more