आहट थी खामोशी कीकि दस्तक तेरे ख्याल कीहर बार दर खोल करतेरा इस्तकबाल कियाहर बार लगा तुम होहर बार दिखा साया तेराहमसाया हो तुम मेरीख्वाब यही चलता रहा।मं शर्मा (रज़ा)
आहट थी खामोशी कीकि दस्तक तेरे ख्याल कीहर बार दर खोल करतेरा इस्तकबाल किया
हर बार लगा तुम होहर बार दिखा साया तेराहमसाया हो तुम मेरीख्वाब यही चलता रहा।
मं शर्मा (रज़ा)