कभी मीठी
कभी कड़क है
ये जीवन भी
चाय की सुड़क है
नींद की खुमारी हो
या थकान भारी है
दूर हर बीमारी हो
बस चाय से यारी हो
पहले इश्क की याद सा
एक प्याला चाय का
हर मर्ज की एक दवा
इश्क कर चाय सा।
मं शर्मा (रज़ा)

कभी मीठी
कभी कड़क है
ये जीवन भी
चाय की सुड़क है
नींद की खुमारी हो
या थकान भारी है
दूर हर बीमारी हो
बस चाय से यारी हो
पहले इश्क की याद सा
एक प्याला चाय का
हर मर्ज की एक दवा
इश्क कर चाय सा।
मं शर्मा (रज़ा)