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इबादत


ये रूठना मनानाखुदा की नेमतसबको नसीब कहाँउल्फत की दौलत

है चाहत हमारीखुदा की इबादतयाद करेगा ज़मानातेरी मेरी चाहत।

मं शर्मा (रज़ा)#स्वरचित

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