इश्क को इश्क समझा होताइबादत समझ लियापत्थर के सनम मिलेखुदा समझ लिया ।मं शर्मा (रज़ा)
इश्क को इश्क समझा होताइबादत समझ लियापत्थर के सनम मिलेखुदा समझ लिया ।
मं शर्मा (रज़ा)