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ह्रदय


आकाश से वृहद ह्रदय मेंसागर सी गहराई हैह्रदय के कोरे कैनवस पेविस्मृत यादों की परछाई है

ह्रदय के विशाल अंक मेंदर्द की गहरी खाई हैपावन ह्रदय प्राणियों मेंप्रभू ने धूनी रमाई है।

मं शर्मा (रज़ा)

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