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हयात


ये जो हयात हैएक रात हैकभी अमावसकभी चाँद रात हैअंधेरों सेघबराना क्याउजालों मेंइतराना क्याअंधेरे उजालों कीएक ही जात हैइतनी सी बात है ।

मं शर्मा( रज़ा)

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