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हर्षित


लखि लखि तेरीहर्षित चितवनउठे मन में उमंगमन मेरा हुआ मगन

धरती हो या गगनहरता सबके विघ्नस्वर्ग लगे ये जीवनतुझको शत शत नमन ।

मं शर्मा (रज़ा)

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