सफर में मिले थे तुमहमसफर बने थे तुमकाफिले को पीछे छोड़आगे बढ़ चले थे हमरास्तों का कुसूर क्यातेरा मेरा वजूद क्याचार पल का साथ थादो पल में बिछड़े थे हम ।मं शर्मा (रज़ा)#स्वरचित
सफर में मिले थे तुमहमसफर बने थे तुमकाफिले को पीछे छोड़आगे बढ़ चले थे हम
रास्तों का कुसूर क्यातेरा मेरा वजूद क्याचार पल का साथ थादो पल में बिछड़े थे हम ।
मं शर्मा (रज़ा)
#स्वरचित