आँधियों से कुछ न बिगड़ेगागहरी बहुत हैं जड़ें हमारीसपनों में नहीं जीते हमज़मीं से जुड़े हुए हैं हम लोग।मं शर्मा (रज़ा)
आँधियों से कुछ न बिगड़ेगागहरी बहुत हैं जड़ें हमारीसपनों में नहीं जीते हमज़मीं से जुड़े हुए हैं हम लोग।
मं शर्मा (रज़ा)