वो हौले हौले चुकता रहाहकीम नब्ज़ टटोलता रहामुद्दत से मर चुका था जिस पेमरके भी उसमें जिंदा रहा।मं शर्मा (रज़ा)
वो हौले हौले चुकता रहाहकीम नब्ज़ टटोलता रहामुद्दत से मर चुका था जिस पेमरके भी उसमें जिंदा रहा।
मं शर्मा (रज़ा)