कभी दिल से निकली तोकभी लफ़्ज़ों की तुकबंदी थीकविता मेरे ख्यालों केआसमान की हदबंदी थी।मं शर्मा (रज़ा)
कभी दिल से निकली तोकभी लफ़्ज़ों की तुकबंदी थीकविता मेरे ख्यालों केआसमान की हदबंदी थी।
मं शर्मा (रज़ा)