पहली शिक्षा माँ से पाई
माँ पहली गुरू कहलाई
मैं अबोध अज्ञानी बालक
तुमने मुझको राह दिखाई
तुमसे ही था अस्तित्व मेरा
तुमने गढ़ा व्यक्तित्व मेरा
तुम धरती पर ईश्वरस्वरूपा
अच्छे बुरे की पहचान कराई
शत शत नमन करूँ मैं तुझको
प्रतिदिन स्मरण करूँ मैं तुझको
भूला कब था मैं माँ तुझको
गुरूपूर्णिमा को तू बहुत याद आई।
मं शर्मा (रज़ा)

