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गुणगान


तन सुंदर मन कोमल तेरातेरी ताकत धीरज तेरादायित्वों में गुंथी माला सीसमस्त जीवन समर्पण तेरा

अभावों में कटे जीवन तेरातुझ संग स्वर्ग लगे घर मेरातू सृष्टि की अद्भुत रचना सीमाँ कैसे करूँ गुणगान तेरा।

मं शर्मा (रज़ा)

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