उपलब्धियों का उच्च शिखर होकि निराशाओं की गहरी धुंध होजीवन में सामंजस्य बिठा जानातुम गुलमोहर बन चली आना ।दोपहर की चिलचिलाती धूप होसाँझ की गुनगुनाती पुरवाई होसूने जीवन में रंग बिखरा जानातुम गुलमोहर बन चली आना ।मं शर्मा (रज़ा)।।।
उपलब्धियों का उच्च शिखर होकि निराशाओं की गहरी धुंध होजीवन में सामंजस्य बिठा जानातुम गुलमोहर बन चली आना ।
दोपहर की चिलचिलाती धूप होसाँझ की गुनगुनाती पुरवाई होसूने जीवन में रंग बिखरा जानातुम गुलमोहर बन चली आना ।
मं शर्मा (रज़ा)।।।