फूल तू रूआब रखना छोड़ दे

आशिकों का हिसाब रखना छोड़ दे

बढ़ता जा रहा है इश्क का सैलाब

फूल तू गुलाब होना छोड़ दे ।



मं शर्मा (रज़ा)