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गुजरे दिन


कोई लम्हा ठहरा नहींकोई लम्हा लौटा नहींदे दर्द या लुटाए खुशीसब को गुजर जाना है

हर सुबह की शाम हैहर दिन की हुई रात हैसब यूँ ही गुजर जाने हैंदिन ये आने जाने हैं ।

मं शर्मा( रज़ा)

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