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गृहणी


जिस दिन आईउस घर सेइस घर कोमैंने अपनाया है

हर संबंध कोहर कर्त्तव्य कोधर्म मान करमैंने निभाया है

गृहणी होनासौभाग्य है मेरातुम ऋणी रहोकभी न चाहा है।

मं शर्मा (रज़ा)

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