रिश्तों की कटी पतंगों केधागों की मरम्मत कर रहा हूँमन के उलझे हुए धागों कीधीरे धीरे गिरह खोल रहा हूँखुशियों की उजड़ी बगियाअपनेपन से सींच रहा हूँ ।मं शर्मा (रज़ा)
रिश्तों की कटी पतंगों केधागों की मरम्मत कर रहा हूँमन के उलझे हुए धागों कीधीरे धीरे गिरह खोल रहा हूँखुशियों की उजड़ी बगियाअपनेपन से सींच रहा हूँ ।
मं शर्मा (रज़ा)