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घाटियाँ


ऊँचे ऊँचे पर्वतों के बीचगहरी सँकरी घाटियाँपर्वतों की धमनियों सीये मनोरम वादियाँ

गुमराह सी लगती हैंकभी पथरीली घाटियाँकभी हरी भरी पगडंडी सीमन लुभाती वादियाँ।

मं शर्मा (रज़ा)

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