आज फिर गरजा है बादल आसमां में
किसी ने शायद पत्थर उछाला है फिर से
घिर के आईं है काली घटाएँ कुछ ऐसे
टूट कर कोई बादल गिर गया हो जमीं पे।
मं शर्मा (रज़ा)


आज फिर गरजा है बादल आसमां में
किसी ने शायद पत्थर उछाला है फिर से
घिर के आईं है काली घटाएँ कुछ ऐसे
टूट कर कोई बादल गिर गया हो जमीं पे।
मं शर्मा (रज़ा)