फूलों की राह नहीं जीवनभीषण सतत संग्राम हैसदियों से लड़ रहा हूँ खुद सेबेसबब नहीं ये थकान हैजीवन के छोर पर मेरा मकान हैरास्ते भर तमाम घमासान हैजीवन पहुँचा नहीं मुझ तक अभीकैसे जिंदा हूँ सोच के हैरान है।मं शर्मा (रज़ा)
फूलों की राह नहीं जीवनभीषण सतत संग्राम हैसदियों से लड़ रहा हूँ खुद सेबेसबब नहीं ये थकान है
जीवन के छोर पर मेरा मकान हैरास्ते भर तमाम घमासान हैजीवन पहुँचा नहीं मुझ तक अभीकैसे जिंदा हूँ सोच के हैरान है।
मं शर्मा (रज़ा)