हवा थोड़ी सर्द हैओस ज़रा सी नम हैमगर धूप में दम हैफिर क्या ग़म हैबस्ती में बसावट हैजीवन की आहट हैरिश्तों में गर्माहट हैशेष न कोई चाहत है।मं शर्मा (रज़ा)
हवा थोड़ी सर्द हैओस ज़रा सी नम हैमगर धूप में दम हैफिर क्या ग़म है
बस्ती में बसावट हैजीवन की आहट हैरिश्तों में गर्माहट हैशेष न कोई चाहत है।
मं शर्मा (रज़ा)