Poetry 1 min read 419.8K reads

गर्माहट


हवा थोड़ी सर्द हैओस ज़रा सी नम हैमगर धूप में दम हैफिर क्या ग़म है

बस्ती में बसावट हैजीवन की आहट हैरिश्तों में गर्माहट हैशेष न कोई चाहत है।

मं शर्मा (रज़ा)

Read more Earn more Learn more